C Language Tutorials in Hindi – सी प्रोग्रामिंग हिंदी में सीखें

इस पोस्ट के अंतर्गत Computer Science का Micro Subject C Programing की जानकारी दी जा रही है जिसमे हमने C Language Tutorials in Hindi कवर किये है। कोशिश के अनुसार यह Notes आपके Syllabus से मेल जरूर रखते है।

C Language क्या है ?

Introduction of C Language in Hindi: दोस्तों सी लैंग्वेज एक सामान्य उद्देश्य से डिजाइन की गई प्रोग्रामिंग भाषा है जिसे सिस्टम सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को डिजाइन करने के लिए बनाया गया था। सी को Dennis Ritchai ने बनाया था 1970 के दशक में। UNIX Operating System को पहली बार सी लैंग्वेज का इस्तेमाल करके बनाया था।

सी लैंग्वेज के विशेष फीचर Low-Level Access to Memory, Simple Sets of Keywords And Clean Style के कारण इसे सिस्टम सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए बेहतर भाषा माना जाता है। Java, PHP, Javascirpt आदि C Language पर ही आधारित है।

सी लैंग्वेज कोड उदाहरण-

#include
void main()
{
printf(“Welcome to, Narbariya.com!”);
}

Output- Welcome to Narbariya.com!

C Language के कितने Version होते है ?

सी लैंग्वेज की शुरुआत से लेकर अब तक अनेक Versions Launch हुए है जी कुछ इस प्रकार है-

  1. K & R : Dennis Ritchie और Brian Kernighan द्वारा Launch किया गया C language का Original Version है।
  2. C89 : यह C का First Standard Version जिसे ANSI द्वारा 1989 में Launch किया गया था।
  3. C99 : ISO द्वारा 1999 में C का New Standard Version Launch किया गया था इस Version में Bulit in data types, keywords और Header files जोड़ी गयी थी।
  4. C11 : ISO द्वारा 2007 में C का एक और New Standard Version Launch किया गया था जिसमे अधिक फीचर्स जोड़े गए थे जैसे Macros, Multithreading इत्यादि।

अभी तक के Versions of C Language में C11 Latest Version है।

C Language का इतिहास

दोस्तों, सी प्रोग्रामिंग भाषा को सिस्टम सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए 1970 में Dennis Ritchai ने डिजाइन किया था। इसे कई वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया गया था।

ALGOL: दरअसल यह कंप्यूटर क्षेत्र में पहली प्रोग्रामिंग भाषा है जिसके कारण सी लैंग्वेज तथा अन्य आधुनिक प्रोग्रामिंग भाषाओ का वजूद सामने आया। असल में ALGOL सी भाषा की मूल है। इसे 1960 में विकसित किया गया था।

1967 में BCPL नमक भाषा का विकास किया गया जिसे मार्टिन रिचर्ड्स द्वारा बनाया गया था। उसके बाद कैम्प थॉमसन ने 1970 में BCPL भाषा में नए फीचर्स जोड़े जिसका नाम उन्होंने B दिया।

1970-72 में Dennis Ritchai ने ALGOL, BCPL और B को मिलाकर एक नयी प्रोग्रामिंग भाषा C का आविष्कार किया। सी लैंग्वेज के दमदार फीचर्स के कारण इसने पूरी दुनिया में क्रांति ला दी।

C Language के फायदे (Featurs Of C Language in Hindi)

  1. तेज : सी भाषा हार्डवेयर के करीब होती है जिसके कारण यह Assembly language के बाद सबसे Fast Programming Language है। हालांकि इसे Law level language भी कहा जाता है लेकिन C Language में बनाये गए Applications की processing very fast होती है।
  2. Extendable : सी लैंग्वेज एक extendable programming language है जिसमे आप खुद से बनाई गयी Libraries इस्तेमाल कर सकते है।
  3. Small : C language में कुछ Keywords प्रदान किये जाते है जिन्हे समझकर कोई भी Programming कर सकता है। इसका Small language होने के कारण उपयोग करना भी आसान है।
  4. Middle Level : यह मध्यम प्रकार की प्रोग्रामिंग भाषा है क्योंकि इसमें programmer law level और high level दोनों प्रकार के Applications Create कर सकते है।
  5. Structured : सी लैंग्वेज में प्रोग्राम को छोटे छोटे Module में Create किया जा सकता है जिन्हे Functions कहते है। इसलिए C Language में किसी भी समस्या को आसानी से Solve किया जा सकता है।

सी लैंग्वेज की सीमाएं

C Language के उपयोग (Usages Of C Language)

C Language को सभी Law Level, Middle Level और High Level Applications Create करने में किया जाता है।

  1. ऑपरेटिंग सिस्टम- हालांकि C Language की शुरुआत Unix Operating System के लिए की थी लेकिन अभी तक Linex, Windows आदि ऑपरेटिंग सिस्टम सी लैंग्वेज में ही डिजाइन किये गए है।
  2. Compilers- ज्यादातर Compilers C Language में ही बनाये गए है जैसे Java के लिए Compiler Javac. अतः इस भाषा से किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा का Compilers Create किये जा सकते है।
  3. Assembles- सी लैंग्वेज में अनेक प्रकार के Assembles Create किये जा सकते है।
  4. Text Editors- सी लैंग्वेज में कई प्रकार के Text Editors भी Create किये जा सकते है।
  5. Network Drivers- C programming language के द्वारा Networks Drivers भी Create किये जा सकते है।
  6. DMS- यहाँ DMS का Full From Database management system है। C के उपयोग से DMS Create किये जा सकते है जैसे Oracle DMS C के इस्तेमाल से ही बनाया गया है।

तो यह थे C programming language के उपयोग।

C Language Vs C++ में क्या अंतर है?

C लैंग्वेज और C++ में अंतर कुछ इस प्रकार है-

  1. C Procedure प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है तो वही C++ Object Oriented प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।
  2. C में Reference Variable की सुविधा नहीं होती है जबकि C++ में इसकी सुविधा है।
  3. Data encapsulation न होने के कारण C में डाटा सिक्योर नहीं रहता है तबकी C++ में Data Encapsulation की हेल्प से डाटा को छुपाया जा सकता है जिसके कारण C++ में डाटा सिक्योर होता है।
  4. C में Function और Operator overloading की सुविधा नहीं होती है तबकी C++ में Function और Operator Overloading की सुविधा पायी जाती है।
  5. C एक मध्यम वर्ग की भाषा है जबकि C++ उच्च स्टार की भाषा है।

Compilers क्या होते है ?

यह ऐसे सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो प्रोग्रामर द्वारा लिखी गयी प्रोग्रामिंग भाषा को मशीन भाषा में तब्दील करते है। जैसे Dev C++ आदि.

Compiler सामान्यत: एक सॉफ्टवेयर होता है जो प्रोग्रामर द्वारा Text Editor में लिखे गए Code को Machine Language में बदलता है इसके आलावा कम्पाइलर प्रोग्राम में Error और Warnings भी खोजता है।

Dev C++ Compiler क्या है ?

C Language के लिए भिन्न भिन्न Platforms हेतु अलग अलग Compilers मौजूद है जिनमे Turbo Compiler, Dev C++ Compilers आदि शामिल है। परन्तु Dev C++ Integrated Development Environment प्रदान करता है साथ ही Automatic Code Completion, Graphics Interface, Syntax Highlighting और एक साथ अनेक Files के साथ Work करने की सुविधा जिसके कारण Dev C++ Compiler में C या C++ Language में Programming करना बहुत आसान है।

Dev C++ Compiler Install कैसे करे ?

सी लैंग्वेज में Tokens क्या होते है ?

Introduction Of C Language Tokens In Hindi

C Language के बाद आने वाली Programming Language सी भाषा पर ही आधारित है। दरअसल C Program Tokens से मिलकर बना है इसलिए यदि आप इन Tokens का उपयोग करना सीख लेते है तो आप C Language Expert बन सकते है।

Tokens का सही क्रम में उदाहरण-

#include
int main()
{
printf(“Narbariya – Sawal Jabab Website”);
printf(“%d”,5);
}

इस Example में दिए गए int, , main , printf आदि Tokens ही है।

यह Tokens 6 प्रकार के होते है –

  1. Identifiers
  2. Keywords
  3. Constants
  4. Variables
  5. Strings
  6. Operators

Identifiers क्या होते है ?

सी लैंग्वेज में Identifiers वह नाम होते है जो हम Variables, Constants और Keywords को देते है। लेकिंन यह नाम देने के लिए कुछ नियम होते है इन नियमो को फॉलो न करने पर Program Error Show करता है।

1. Identifiers में @ – % Characters इस्तेमाल नहीं किये जाते है।

2. C Language में Age और age में अंतर होता है क्योंकि यह Case Sensitive Language है।

3. Identifiers में Operators का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

4. Identifiers हमेशा Characters से शुरू किये जाते है कभी भी Digits से शुरू न करे।

Example-

age // सही है

2age // गलत है

Hkh-age // गलत है

hkh_2_age // सही है

Character Sets क्या होता है ?

#include
int main()
{
printf(“Narbariya – Sawal jabab website”);
printf(“%d”,5);
}

ऊपर दिए गए Program में Characters की sequence में लिखते है जैसे #include , है इस Statement को Characters से मिलाकर बनाया गया है जिसमे i,n,c,l और h आदि characters है।

C language में कौन कौन से Characters उपयोग कर सकते है इसके लिए Character Set बनाया गया है।

1. Alphabets- आप सी भाषा में अंग्रेजी के बड़े और छोटे अक्षर क्रमशः A से Z और a से z के बीच कोई भी इस्तेमाल कर सकते है।

2. Digits- अंकों में आप 0 से लेकर 9 तक कोई अभी अंक C Programming में इस्तेमाल कर सकते है।

3. Special Characters- जैसे ! @ # $ % ^ & * ( ) _ – = + { } [ ] ? ” , /

Alphabet, Digits और Special Characters के आलावा आप C language में कोई अन्य Characters उपयोग नहीं कर सकते है। इसे ही Characters Set कहते है।

Keywords क्या होते है ?

C Language कुल 32 Keywords प्रदान करती है जिसमे हर एक keyword का एक खास कार्य होता है। सी प्रोग्रामिंग में कीवर्ड्स पहले से Define किये गए वर्ड्स या रिज़र्व वर्ड्स कहते है।

यह रहे 32 Keywords-

  1. auto
  2. break
  3. case
  4. char
  5. const
  6. continue
  7. default
  8. do
  9. double
  10. else
  11. enum
  12. extern
  13. float
  14. for
  15. goto
  16. if
  17. int
  18. long
  19. register
  20. return
  21. short
  22. signed
  23. sizeof
  24. static
  25. struct
  26. switch
  27. typedef
  28. union
  29. unsigned
  30. void
  31. volatile
  32. while

C Language में Data Types क्या है ?

जब भी आपको कोई Variable Create करना होता है तो उससे पहले Compiler को यह बताना होता है कि आप किस प्रकार के Data को Variable में Store करने जा रहे है इससे यह होता है कि Computer Variable को उतना ही Memory देता है जितनी उसे जरुरत होती है।

अगर किसी Programming Language में Variable न हो तो Computer बहुत साड़ी Memory Waste कर सकता है इसलिए Data Store करने से पहले Maximum Memory Limit Define की जाती है।

/* A Integer type variable */
int name;

यह Statement Compiler को यह बता रहा है कि name variable में एक Whole Number को Store करने वाले है। इसलिए कंप्यूटर जरुरत के अनुसार ही Computer की Memory में से Memory Allot करता है।

C Data Types के प्रकार-

1. Integer Types
1.1 int
1.2 short int
1.3 long int
1.4 signed int
1.5 unsigned int

2. Floating Point Types
2.1 float
2.2 double

3. Character Types
3.1 char
3.2 unsigned char

1. Integer Types- इस प्रकार का Data Types किसी भी Whole Number (बिना दशमलव के) को Store करने के लिए उपयोग किया जाता है यह 5 प्रकार के होते है। एवं इसके 5 प्रकारों को इनकी Memory और Range के आधार पर इस्तेमाल किया जाता है।

2. Floating Point Types- यह data types दशमलव वाली संख्याओं को Store करने के लिए इस्तेमाल करते है। यह डाटा टाइप दो प्रकार का होता है।

3. Character Types- इसे Characters को Store करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे 2 श्रेणी में बांटा गया है।

C Language Variables क्या होते है ?

कंप्यूटर में डाटा को स्टोर करने के लिए Variable का इस्तेमाल किया जाता है।

उदाहरण:- जब आप कंप्यूटर ने कोई डाटा स्टोर करना चाहते है लेकिन डाटा स्टोर करने से पहले आप कंप्यूटर को बताते हो कि आप किस तरह का डाटा को स्टोर करना चाहते हो ताकि आपको कंप्यूटर की मेमोरी में से Space मिल सके, इसके बाद आप उस memory location का नाम define करते हो यही नाम Variable कहलाता है।

यह दो तरह के होते है-

1. Local Variable – जो किसी Program के छोटे Block में Define किया जाता है।
2. Global Variable – इनका Scope पूरे प्रोग्राम में होता है इन्हे प्रोग्राम के शुरू में ही Define किया जाता है।

Constants क्या होते है ?

ऐसे Variables जिनकी Value प्रोग्राम किंयान्वन के दौरान किसी भी प्रकार से Change नहीं होती है यदि हम Value Change करते है तो Program में Error आ सकते है।

1. Constants Literals
2. Constants Variables

C Language Operators क्या होते है ?

इसका जबाब आप कमेंट में लिखें!

उपरोक्त टॉपिक्स से आपको कुछ मदद मिल सकती है। दोस्तों अभी फ़िलहाल इतने ही विषय आगे की विषय भी जल्द ही पूरे किये जायेगे! यदि आपको इनके उत्तर मालूम है तो कमेंट बॉक्स में हमें लिखे!

  • सी में पहला प्रोग्राम कैसे बनाये ?
  • सी प्रोग्राम डेवलपमेंट साइकिल क्या है ?
  • Flowchart क्या होता है ?
  • Comenting क्या होती है ?
  • Decision Making क्या है ?
  • C में Looping क्या है ?
  • Arrays क्या होते है ?
  • Strings क्या है ?
  • C Functions क्या होते है, फायदे और प्रकार
  • C Union क्या है ?
  • C Recursion क्या है एवं इसके प्रकार फायदे और नुकसान सहित
  • C Pointers क्या है इसके फायदे और नुकसान सहित
  • C Type Casting क्या है ? एवं इसके प्रकार
  • Storage Classes क्या है एवं प्रकार
  • C Console I/O क्या है ?

C Language Tutorial in Hindi यही समाप्त होता है! धन्यबाद !

C Language Tutorials in Hindi – सी प्रोग्रामिंग हिंदी में सीखें

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