500+ शब्दों में वृक्षारोपण पर निबंध रुपरेखा के साथ इन हिंदी

वृक्षारोपण पर निबंध

वृक्षारोपण पर निबंध रुपरेखा के साथ इस पोस्ट में उपलब्ध है अक्सर अनेक विद्यार्थी पढ़ाई के लिए हिंदी भाषा निबंध खोजते है इसलिए आपकी मदद के लिए यहां वृक्षारोपण पर निबंध रुपरेखा के साथ 200 शब्दों में नहीं बल्कि 600 शब्दों में निबंध प्रस्तुत है।

वृक्षारोपण पर निबंध (Essay on Tree Plantation in Hindi)

वन किसी भी मानव और तमाम जानबरों के लिए अति महत्वपूर्ण है लेकिन हम इनके महत्त्व को ध्यान से समझ नहीं रहे है ये निबंध आपको वृक्षारोपण का महत्त्व सहित एक बेहतरीन सोच देने में मदद करेगा।

रुपरेखा – वृक्षारोपण पर निबंध

  1. प्रस्तावना
  2. भारतीय संस्कृति और वृक्ष
  3. वनों से लाभ
  4. वृक्षों के काटने से हानियां
  5. वृक्षारोपण कार्यक्रम
  6. उपसंहार

वृक्षारोपण पर निबंध प्रस्तावना

  1. भारत की संस्कृति एवं सभ्यता वनों में ही पल्लवित तथा विकसित हुई है।

2. वृक्ष मानव का एक तरह से जीवन सहचर है।

मेरे हाथों में ना होते सरोवर जल से आपुरित रहते है और न सरिताएं ही कल – कल ध्वनि से प्रवाहित होती । वृक्षों की जड़ों में वर्षा – ऋतु का जल धरती के अंक में पहुंचता है। यही जल अक्षय कुछ स्त्रोतों में गमन करके अपार जल – राशि प्रदान करता है। इससे मानव जीवन को राहत तथा सुख चैन मिलता है।

भारतीय संस्कृति और वृक्ष

  1. भारत की सभ्यता वनों की गोद से ही विकासमन हुई है।

2. हमारे ऋषि तथा मुनियों ने वृक्ष की छाया में बैठकर ही ज्ञान के को मानव को सौंपा है।

वनों की गोद में ही गुड गुरुकुल की स्थापना की गायी थी। इन गुरुकल में अर्थशास्त्री, शासक , दार्शनिक तथा राष्ट्र – निर्माता शिक्षा ग्रहण करते थे। इन्हीं वनों में आचार्य तथा ऋषि , मानव के हित – साधन के लिए अनेक सूत्रों की खोज करते थे। यह कर्म लगातार चला आ रहा है। वनों की हरितीमा , पक्षियों का कलरव , पुष्पो से आच्छ दित लताएं , भरमरो की गुंजार तथा तितलियों की अठखेलियां मानव – मन को सहज ही अपनी और आकर्षित कर रही हैं।

वनों से लाभ

  1. वनों से हमें निर्माण की सामग्री मिलती है। औषधियों , जड़ी – बूटियों , गोंद वर्षा में भी सहायक हैं। रंग तथा कागज का स्रोत भी वन हैं। वन तापमान को सामान्य बनने में सहायक हैं। ये मिट्टी के कटाव पर अंकुश लगाने हैं। दूषित वायु को ग्रहण करके शूद्र एवं जीवनदायक वायु हमें प्रदान करते हैं। मानव की जिन्दगी के लिए जितनी वायु तथा जल अपरिहार्य हैं , उतने वृक्ष भी आवश्यक हैं। तुलसी , पीपल तथा वट-वृक्ष कोटि- कोटि

मानवों के श्रद्धा- पात्र हैं। गीता में पीपल वृक्ष का उल्लेख भगवान श्रीकृष्णा ने किया है

वृक्षों के काटने से हानियां

आज मानव भौतिक प्रगति के लिए आतुर है। वह वृक्षों को अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए निष्तुरता तथा बेदर्दी से काट रहा है। औद्योगिक प्रतिस्पर्धा तथा जनसंख्या की वृद्धि के फलस्वरूप वनों का क्षेत्रफल दिन- प्रतिदिन घटता चला सा रहा है। वृक्षों पर चहचहाने वाले पंछियों का कलरव समाप्त- सा हो चला है। पक्षी प्राकृतिक संतुन स्थल रखने के प्रमुख कारक हैं। इनके अभाव में यह संतुलन लड़खड़ा जायेगा । अगर मानव ने इसी प्रकार वृक्षों की कटाई जारी रखी तथा नये वृक्ष नहीं लगाएंगे तो इसके असित्तव पर ही प्रशन – चिह लग जायेगा । वृक्षारोपण की योजना कोई नहीं है। हमारे राजा-महाराजाओं ने मानव की सुविधा हेतु सड़कों के दोनों और छायादार रक्ष लगाए थे

वृक्षारोपण कार्यक्रम

वृक्षारोपण के महत्व भूतपूर्व केंद्रीय खास मंत्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने स्वीकारा था। इसके पश्चात इस कार्यक्रम को प्रतिदिन विस्तृत किया जाता रहा है।

उपसंहार

आज हमारे देशवासी वनों की महत्ता को से एक स्वर से स्वीकार कर रहे हैं। वन महोत्सव हमारे राष्ट्र की अनिवार्य आवशयकता है देश की समर्दिधा में वृक्षों का अपूर्व योगदान है। ये आर्थिक उन्नति के साधन है। इसलिए राष्ट्र के हर नागरिक का कर्तव्य बनता है कि वह वनों को लगातार धरती को हरा-भरा बनाए ।.

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