सिंधु घाटी सभ्यता की पूरी जानकारी

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सिंधु घाटी सभ्यता (sindhu ghati sabhyata) जिसे अंग्रेजी में Indus Valley Civilization भी कहते है, आज के लेख में हम आपको बताने वाले है कि सिंधु सभ्यता जो की अनेक नामो से जानी जाती है के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में।

sindhu ghati sabhyata को सिंधु सरस्वती नदी की सभ्यता भी कहा जाता है यह भारत की प्राचीन सभ्यता मानी जाती है जैसे चीन की सभ्यता। ब्रिटिश पत्रिका ‘नेचर’ के अनुसार यह 8000 वर्ष पूर्व की सभ्यता है. इतिहासकारों की सुने तो यह सबसे व्यवस्थित और सुखद नगर है।

sindhu ghati sabhyata – विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है। आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व पाकिस्तान के ‘पश्चिमी पंजाब प्रांत’ के ‘माण्टगोमरी ज़िले’ में स्थित ‘हरियाणा’ के निवासियों को शायद इस बात का किंचित्मात्र भी आभास नहीं था कि वे अपने आस-पास की ज़मीन में दबी जिन ईटों का प्रयोग इतने धड़ल्ले से अपने मकानों के निर्माण में कर रहे हैं, वह कोई साधारण ईटें नहीं, बल्कि लगभग 5,000 वर्ष पुरानी और पूरी तरह विकसित सभ्यता के अवशेष हैं। इसका आभास उन्हें तब हुआ जब 1856 ई. में ‘जॉन विलियम ब्रन्टम’ ने कराची से लाहौर तक रेलवे लाइन बिछवाने हेतु ईटों की आपूर्ति के इन खण्डहरों की खुदाई प्रारम्भ करवायी। खुदाई के दौरान ही इस सभ्यता के प्रथम अवशेष प्राप्त हुए, जिसे इस सभ्यता का नाम ‘हड़प्पा सभ्यता‘ का नाम दिया गया। – Resource – Bharat Discovery.

सिंधु घाटी सभ्यता की खोज कब हुई?

इसका विकास प्राचीन सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे लगभग 2400 ईसा पूर्व से 1700 ईसा पूर्व मानी जाती है। सबसे पहले सभ्यता के बारे में चाल्स मैंसन ने बेसिक जानकारी प्रदान की फिर उसके बाद 1856 में बर्टन बंधुओं ने मजबूत इटो का इस्तेमाल कराची से लाहौर तक रेलवे लाइन बनाने में किया, लेकिन बर्टन बंधू ने सभ्यता के बारे में कोई भी अंदेशा नहीं था. उसके बाद सर जॉन मार्सल ने आधिकारिक तौर पर सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई का कार्य शुरू किया।

सिंधु सभ्यता की खोज 1921 ने रायबहादुर दयाराम साहनी ने की थी।

सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता क्यों कहा जाता है?

ऐसा इसलिए क्योंकि जब सिंधु सभ्यता का नाम सिंधु सभ्यता रखा गया तब यह नाम सिंधु नदी के कारण रखा गया, परन्तु जब आगे की खोज के दौरान पता चला तो कुछ नगर सरस्वती नदी की किनारे भी पाए गए। तब शोधकर्ताओं ने फैसला किया की जिस नगर की खोज सबसे पहले हुई उसी के आधार पर सभ्यता का नाम रखा जायेगा।

और सबसे पहले हड़प्पा नामक नगर की खोज दयाराम साहनी द्वारा की गयी थी इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता कहते है।

सिन्धु घाटी सभ्यता का मुख्य व्यवसाय क्या था?

वह लोग बड़े पैमाने पर व्यापार करते थे जिनमे मुख्या चीजें गेहूं, चावल, जौ, दाल, सोना, चांदी, तांवा, टिन, कांसा, सीसा,मटर,सरसों जैसी वस्तुए शामिल है।

सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल कौन सा है?

सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल मोहनजोदड़ो है तबकी भारत में बड़ा स्थल राखीगढ़ी हैं जो कि आज के समय में भारत के हरियाणा में स्थित है।

सिंधु घाटी सभ्यता में कितने नगर थे?

Indus Valley Civilization में 1400 नगरों या केन्द्रो को खोजा गया है जिनमे से 925 भारत में स्थित है और बचे हुए पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान में मौजूद है।

हड़प्पा सभ्यता के पतन के मुख्य कारण क्या है?

इसके पतन का मुख्य कारण प्राकृतिक घटनाएं मानी जाती है जैसे बाढ़, तूफान, पानी की कमी क्योकि नदियों ने अपनी पानी की दिशा बदल ली थी आदि।

हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख देन क्या थी?

हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख देन जैसे नगरो की ग्रिड पद्धति जिसमे मजबूत इटो से बने हुए पक्के घर, व्यवस्थित नालियां जिनसे गंदगी नगर के बाहर जाती थी, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, गढवारीवाला,हड़प्पा, धोलावीरा, राखीगढ़ी जैसे 6 नगर इसके प्रमुख है। इनकी योजनाबद्ध भवन निर्माण पद्धति सर्वश्रेष्ठ विशेषता थी।

सिंधु वासियों की प्रधान देवी कौन थी?

वैसे तो sindhu ghati sabhyata में अनेक देवियो की मूर्ति पायी गयी है लेकिन प्रमुख रूप से इनकी प्रधान देवी पशुपति थी जिन्हे यह पशुओं की रक्षक मानते थे।

सिंधु सभ्यता का बंदरगाह कौनसा है ?

लोथल।

सभ्यता का विस्तार

अब तक इस sindhu ghati sabhyata के अवशेष पाकिस्तान और भारत के पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के भागों में पाये जा चुके हैं। इस सभ्यता का फैलाव उत्तर में ‘जम्मू’ के ‘मांदा’ से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने ‘भगतराव’ तक और पश्चिमी में ‘मकरान’ समुद्र तट पर ‘सुत्कागेनडोर’ से लेकर पूर्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ तक है। इस सभ्यता का सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल ‘सुत्कागेनडोर’, पूर्वी पुरास्थल ‘आलमगीर’, उत्तरी पुरास्थल ‘मांडा’ तथा दक्षिणी पुरास्थल ‘दायमाबाद’ है। लगभग त्रिभुजाकार वाला यह भाग कुल क़रीब 12,99,600 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सिन्धु सभ्यता का विस्तार का पूर्व से पश्चिमी तक 1600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण तक 1400 किलोमीटर था। इस प्रकार सिंधु सभ्यता समकालीन मिस्र या ‘सुमेरियन सभ्यता’ से अधिक विस्तृत क्षेत्र में फैली थी। – Bharat Discovery

sindhu ghati sabhyata की अधिक जानकारी लगातार अपडेट की जाएगी।

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