550+ शब्दों में विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध इन हिंदी

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध हिंदी में :- इस पोस्ट में आपको यह जानकारी मिलने वाली है कि किस तरह किसी भी विद्यार्थी के लिए अनुशासन जरुरी होता है ताकि वह अपनी Life में अनुशासन का महत्त्व समझ सके। – Essay on Student and Discipline.

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध रुपरेखा सहित

  • प्रस्तावना, 
  • अनुशासन का महत्त्व,
  • विद्यार्थी और अनुशासन,
  • अनुशासन की शिक्षा 
  • अनुशासन के लाभ, 
  • अनुशासनहीनता एक अभिशाप, 
  • अनुशासन की आवश्यकता, 
  • उपसंहार

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध प्रस्तावना

‘अनुशासन’ शब्द का अर्थ है-नियम के पीछे चलना। अनुशासन का अर्थ परतन्त्रता कदापि नहीं है। समय, स्थान तथा परिस्थितियों के अनुरूप सामान्य नियमों का पालन करना ही अनुशासन कहलाता है। अनुशासन मानव जीवन काआधार है। 

विद्यार्थी और अनुशासन का महत्त्व

अनुशासन का जीवन में विशेष महत्त्व है। समस्त प्रकृति एक अनुशासन में बँधकर चलती है, इसलिए उसके किसी भी क्रियाकलाप में बाधा नहीं आती है। दिन-रात नियमित रूप से आते रहते हैं। इससे स्पष्ट है किअनुशासन के द्वारा ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

अनुशासन से भटक जाने पर व्यक्ति चरित्रहीन, दुराचारी तथा निन्दनीय हो जाता है। समाज में उसका कोई सम्मान नहीं रहता है।

विद्यार्थी और अनुशासन

विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भावी जीवन की आधारशिला है। विद्यार्थी अनुशासन में रहकर ही स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यवहार तथा आचार ग्रहण कर सकता है। नियमित रूप से अध्ययन करना, विद्यालय जाना, व्यायाम करना, गुरुजनों से सद्व्यवहार करना ही विद्यार्थी जीवन का अनुशासन।

अनुशासन की शिक्षा

बच्चे का प्रथम सम्पर्क अपने माता-पिता तथा परिवार से होता है। अन्य प्रकार की शिक्षा के समान अनुशासन की शिक्षा भी बच्चे को यहीं से प्राप्त होती है। इसके बाद विद्यालय तथा बाह्य समाज से अनुशासन की शिक्षा मिलती है। अनुशासन का पालन आत्म-नियन्त्रण तथा भय से होता है।

आत्म-नियन्त्रण से होने वाला अनुशासन स्थिर माना गया है। इसकी शिक्षा संस्कारों से मिलती है। दूसरे प्रकार का अनुशासन बाहर के आतंक के कारण होता है। यह शासन चलाने का प्रकार है, अनुशासन का नहीं। 

अनुशासन के लाभ

अनुशासन के द्वारा ही सफल जीवन-यापन किया जा सकता है। अध्ययन, व्यवहार, खेलकूद, व्यायाम, शासन आदि आत्मानुशासन के उपकरण हैं। इन्हीं के द्वारा तन तथा मन स्वस्थ रहते हैं, अनुशासन के कारण ही मनुष्य उच्च आदर्शों की ओर बढ़ता है।

अनुशासन के द्वारा ही ज्ञान प्राप्ति सम्भव है। पवित्र मन तथा बुद्धि से ही ज्ञान का संचार होता है। चरित्र के निर्माण में अनुशासन का विशेष योग रहता है।

अनुशासनहीनता एक अभिशाप

अनुशासनहीनता एक अभिशाप है। यह समाज को नष्ट कर देता है। दुर्भाग्यवश आज अनुशासनहीनता बढ़ रही है। विद्यालय, छात्रावास, बाजार, घर, समाज आदि सभी में अनुशासन का अभाव दिखायी पड़ता है।

धर्म तथा समाज के नियन्त्रण समाप्त हो रहे हैं। साथ ही शासन का प्रभुत्व भी घट रहा है। प्रशासन में अधिकारी, कर्मचारी आदि स्वयं ही अनुशासनहीन हो गये हैं।

अनुशासन की आवश्यकता

अनुशासन में रहकर ही शक्ति का संचार होता है जो राष्ट्र जितना अधिक अनुशासित होता है, वह उतना ही अधिक विकास कर जाता है। अनुशासित कल-कारखाने, विद्यालय, कृषि, मजदूरी, नौकरी आदि सभी के द्वारा ही देश तथा समाज को सुखी एवं सम्पन्न बनाया जा सकत है।

दूसरे राष्ट्रों से सुरक्षित रहने के लिए भी अनुशासन, आवश्यक है। सेना अनुशासन में रहकर ही युद्ध कर पाती है, विद्यार्थी अनुशासन में रहकर ही ज्ञान प्राप्त कर पाता है तथा व्यापारी एवं उद्योगपति भी अनुशासन का पालन करके ही अपना उत्तरदायित्व निभा पाता है।

उपसंहार

बिना अनुशासन के मानव-जीवन का कोई भी क्रिया-कलाप नहीं चल सकता है। विद्यार्थी जीवन तो इसकी धुरी है। छात्रों के भविष्य को अनुशासन भव्य तथा मंगलमयं बनाता है। अनुशासनप्रिय छात्र सफलता को प्राप्त होता है।

सफलता अथवा असफलता का मापदण्ड अनुशासन है। ये दैनिक जीवन को व्यवस्थित करता है। गुणों का बीजारोपण करने वाला है। सद्भावना का विस्तार करके विश्व जीवन को भव्यता प्रदान करता है। अनुशासनमय जीवन ही महान् जीवन का परिचायक है।

अंत में इस “विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे।

-:यह भी पढ़े:-

Download "Vestige Pedia" App

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.