दिवाली कब है? दिवाली क्यों मनाई जाती है ?

दीपावली रविवार, 27 अक्तूबर 2019 को है।

इस दिन लोग अपने घरों में दीप जलाकर पटाके फोड़ते है और ख़ुशी मानते हुए पकवान बनाते है और एक दुसरे से मिल जुल कर भोजन करते है इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है।

दिवाली क्यों मनाई जाती है ?

भारत में दिवाली बनाने का कोई एक कारण नहीं है लेकिन सभी लोगो का अपना नजरिया और दीपावली मनाने का अलग कारण होता है यहाँ मैंने आपके लिए सभी कारणों के बारे में बताया है जो निम्न है-

1.जब श्रीराम वनवास से लौटकर आये थे जब इसकी ख़ुशी में पूरी रात दिए जलाकर उनका स्वागत किया था।

2.राजा विक्रमादित्य के अभिषेक के कारण क्योंकि कार्तिक आमवस्य के दिन ही उनक राज्य अभिषेक हुआ था। राजा विक्रमादित्य एक शक्तिशाली सम्राट थे जिन्होंने मुग़ल साम्राज्य के दाँत खट्टे कर दिए थे।

3. श्रीकृष्ण के द्वारा राक्षस नरकासुर का वध इसी दिन किया गया था इसलिए बन्हि दिवाली मानते है ऐसा कुछ लोगो का मानना है।

4. समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी जी ने अवतार लिया था इसलिए उनके लिए एक विशेष पूजा की गई इसलिए इसी पूजा को दीपावली के नाम से मनाने लगे।

दिवाली का महत्व क्या है

जैसा की हम जानते है कि दिवाली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है यह त्यौहार केवल भारत ही नहीं नेपाल, श्रीलंका, भूटान, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी मनाया जाता है साथ ही दिवाली क्यों मानते है इसके कारण बहुत सामने आते है क्योंकि अलग अलग दृश्टिकोण वाले लोगो के लिए दिवाली मनाने का कारण अलग होता है इसलिए दीपावली का महत्त्व और भी अधिक हो जाता है।

दिवाली 5 दिनों का त्यौहार होता है जिसमे सभी दिनों का अपना अपना अलग अलग महत्त्व है जैसे धनतेरस, भाई दूज, छोटी दीपावली गोवर्धन पूजा आदि।

1. धनतेरस:- यह दिवाली का सबसे पहला दिन होता है इस दिन सभी लोग खासतौर पर घर की औरते सोने के आभूषण, चाँदी के वर्तन, घर को सुन्दर बनाने के लिए अनेक वस्तुए खरीदती है।

2. छोटी दीपावली:- इस दिन सभी लोग छोटी दिवाली के तौर पर दिवाली को मनाते है।

3. दिवाली:- यह दीपावली का मुख्य दिन होता है इसलिए इस दिन का नाम भी दीपावली के नाम पर ही बुलाया जाता है, इसी दिन घर के सभी सदस्य एक साथ मिलकर अनेक पकवानों के साथ अपनी घर की वस्तुए की पूजा करते है और दिए जलाकर पूरे घर में उजाला करते है एवं आस पड़ोस में दिए आदान प्रदान किये जाते है और फिर बच्चे पटाके जलाकर आनंद लेते है।

4. गोवर्धन:- दरसअल दिवाली के इस चौथे दिन 56 भोग के साथ गोवर्धन की पूजा की जाती है।

5. भाईदूज:- यह दिवाली का अंतिम दिन होता है जिसमे बहन अपने भाई का तिलक करती है और भाई दूज के जश्न को मानती है यह रक्षाबंधन का छोटा रूप होता है।

सच में दिवाली खुशियों का त्यौहार है जिसमे सभी घर, पड़ोस, रिस्तेदार मिलकर एक दुसरे को खुशियाँ बाँटते हुए जश्न मनाते है।
इस दिवाली मन के सारे मैल धो डालो!

दिवाली कब है? दिवाली क्यों मनाई जाती है ?

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