दीपावली पर्व पर निबंध 700+ शब्दों में (Diwali Essay in Hindi)

दीपावली पर्व पर निबंध

दीपावली पर्व पर हिंदी में निबंध – आज फिर एक बार लेकर आये है आपके लिए 200 Words, 300 Words,600 Words नहीं बल्कि पूरे 700+ शब्दों में Diwali Essay in Hindi. अनेक प्रकार के लोग Diwali का महत्त्व नहीं समझते है इसलिए यह आर्टिकल आपको दीपावली पर्व की पूरी जानकारी देने वाला है।

दीपावली पर्व पर निबंध रुपरेखा

  • प्रस्तावना-हमारे त्योहार, 
  • मनाने के आधार-व्यापारिक, सामाजिक और  सांस्कृतिक,
  • दीपावली का महत्त्व, 
  • दीपावली मनाने की विधि तथा संलग्न त्योहारों का वर्णन, 
  • उपसंहार

दीपावली पर्व पर निबंध प्रस्तावना

मनुष्य उत्सव प्रिय है, इसलिए समाज में प्रत्येक ऋतु में आमोद-प्रमोद के लिए किसी न किसी त्योहार या मेले के आयोजन का विधान किया है। शरद ऋतु का महत्त्वपूर्ण त्योहार दीपावली है, जो कार्तिक की अमावस्या को मनाया जाता है।

दीपावली शब्द का अर्थ है– दीप + अवलि अर्थात् दीपों की पंक्ति।

इस दिन घर, गली, नगर, ग्राम सभी दीपकों के आलोक से प्रकाशित होते हैं। दीपावली जोश, आनन्द तथा स्वच्छता का त्योहार है। यह जागृति तथा स्फूर्ति का अग्रदूत है। अन्धकार से आवृत्त विश्व को प्रकाश का सन्देश देता है। निरन्तर प्रकाश स्रोत बनकर आगे कदम बढ़ाने की प्रेरणा प्रदान करता है।

दीपावली पर्व मनाने के आधार

दीपावली मनाने के कारण अनेक हैं। व्यापारी इस दिन को व्यवसाय के लिए शुभ मनाते हैं। इस शुभ दिन से नवीन बही आरम्भ करते हैं। दीपावली जिस समय मनायी जाती है, उस समय खरीफ की फसल तैयार होती है।

ज्वार, बाजरा, मक्का आदि किसान के घर आते हैं। उसका हृदय उल्लास से भरा होता है। उसी उल्लास में वह दीपावली का उत्सव मनाता है। 14 वर्ष के बाद वनवास की अवधि समाप्त करके, रावण पर विजय प्राप्त कर रामचन्द्रजी इसी दिन अयोध्या लौटे थे।

उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने भारी हर्ष और उल्लास के साथ खुशियाँ मनायीं और अपने घरों पर दीपक जलाकर प्रकाश किया था। इसी दिन गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस यही था। इस कारण से इस त्योहार पर दीप जलाकर प्रकाश किया जाता है.

दीपावली पर्व मनाने का महत्त्व

दीपावली मनाने के कारण कुछ भी हों, परन्तु विविध दृष्टियों से यह त्योहार विशेष महत्त्व का है। सफाई की दृष्टि से विचार करें तो वर्षा ऋतु में विभिन्न प्रकार के छोटे-छोटे जीव तथा जीवाणु पैदा हो जाते हैं।

अतः सर्वत्र गन्दगी का साम्राज्य हो जाता है। इस त्योहार पर सब घरों की सफाई करते हैं। गन्दे वातावरण को शुद्ध करने के लिए दीपक जलाये जाते हैं। दीपकों से उठने वाली लौ और गैस विषाक्त जीवाणुओं को नष्ट कर देती है और रोग के जीवाणुओं को मारती है।

इस प्रकार स्वस्थ वातावरण के लिए इस त्योहार का एक विशेष महत्त्व है। यह पर्व भौतिक और आध्यात्मिक प्रकाश का सन्देश लेकर आता है।

दीपावली मनुष्य की सम्पन्नता तथा प्रगति का त्योहार है। उल्लास, आनन्द और कल्याण का अवसर है। 

दीपावली मनाने की विधि

यह त्योहार पाँच दिन तक मनाया जाता है। इसका प्रारम्भ धन-तेरस से होता है। यह वैद्यराज धन्वन्तरि का अवतार दिवस है। चतुर्दशी को छोटी दीपावली मानते हैं। तीसरे दिन अमावस्या को मुख्य त्योहार होता है।

इस दिन वृद्ध, युवा तथा बच्चों प्रात:काल से ही उत्साह होता है। बड़े लोग अपने दायित्वपूर्ण कार्यों में लगते हैं। बालकों को मिठाइयाँ, खिलौने, आतिशबाजी मुग्ध कर देती है। पटाखे चलाकर धूम मचाते बच्चे अपना आनन्द प्रकट करते हैं।

इस दिन विविध प्रकार के व्यंजन बनाये जाते हैं। सभी सुन्दर, स्वच्छ और नवीन कपड़े पहनते हैं। शाम के समय दीपमालाओं से घरों में प्रकाश किया जाता है।

रात्रि को घर के सभी लोग लक्ष्मीजी का पूजन करके धन की वृद्धि की कामना करते हैं। त्योहार के चौथे दिन गोवर्द्धन पूजा होती है। इस दिन अन्नकूट तैयार किया जाता है।

प्रसिद्ध है कि जब ब्रज के विनाश के लिए इन्द्र क्रोधित होकर वर्षा करने लगे तब समस्त ब्रजमण्डल में गोवर्द्धन की पूजा की गयी, जिससे ब्रज की रक्षा हुई और इन्द्रदेव का अभिमान चूर हुआ।

पाँचवें दिन भ्रातृ-द्वितीय को बहिनें भाई के टीका करके दीर्घजीवी होने की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई बहिन को वस्त्र, धन आदि देकर उनका सम्मान करते हैं। इससे स्नेहभाव में वृद्धि होती है।

उपसंहार

इस त्योहार के साथ-साथ समाज में कुछ दोष भी आ गये हैं। इस अवसर पर लोग जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं। इस बुरे वातावरण को समाज से दूर करना चाहिए जिससे त्योहार की पवित्रता तथा उपयोगिता स्थिर रह सके।

दीपावली का त्योहार सुख, समृद्धि एवं आलोक (प्रकाश) का त्योहार है। हमें इस दिन व्रत लेना होगा कि हम केवल बाहरी स्वच्छता ही न करें अपितु हृदय को भी स्वच्छ तथा पवित्र बनायें। धरा पर कहीं अन्धकार की छाया दृष्टिगोचर न हो।

कविवर नीरज के शब्दों में-

            “जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना।

             धरा पर अँधेरा कहीं रह न जाए॥”

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