दहेज प्रथा पर निबंध हिंदी में (Essay on Dowry System in Hindi)

दहेज प्रथा पर निबंध हिंदी में

दहेज प्रथा पर निबंध: दोस्तों प्राचीनकाल से लेकर आज तक दहेज प्रथा पर अंकुश नहीं लगा है समाज में इसके वजूद के कारण अनेक सामाजिक समस्याए उत्पन्न हो रही है यह सामाजिक कुरीति सैकड़ों बेटियों की ज़िंदगी को तवाह करते आया है एवं प्रक्रिया निरंतर जारी है…इसलिए दहेज पर निबंध हिंदी में पेश किया जा रहा है अच्छा लगे तो शेयर अवश्य कीजिये।

दहेज प्रथा पर निबंध : एक सामाजिक समस्या

प्रस्तावना

आज भारतीय समाज में दहेज एक अभिशाप के रूप में व्याप्त है। दहेज के आभाव में निर्धन माता पिता अपनी बेटी के हाथ पीले करने में स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं। दहेज उन्मूलन के जितने प्रयास किए जाते हैं इतना ही वह सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है। 

प्राचीन काल में दहेज का स्वरूप

प्राचीन काल में कन्या को ही सबसे बड़ा दान समझा जाता था।  माता-पिता वर पक्ष को अपने सामर्थ्य के अनुसार जो कुछ देते थे, उसे भी सहर्ष स्वीकार कर लेते थे और जो धन कन्या को दिया जाता था, स्त्री धन समझा जाता था। 

मध्यकाल में नारी की दयनीय स्थिति

मध्यकाल में नारी के प्राचीन आदर्श ‘ यत्र नार्यस्तु पूज्यंते’  को झुठलाकर उसे भोग एवं विलासिता का साधन बना दिया गया। उसका स्वयं का अस्तित्व घर की चारदीवारी में संतान उत्पत्ति करने में सिमट  कर रह गया। इस समय पर पुरुष समाज द्वारा उसे धन के समान भोग वस्तु समझा जाता है। उसके धन को माता – पिता द्वारा दिए गए धन वह अपनी वास्तु समझने लगा।

दहेज प्रथा रोकने के उपाय

वैसे तो यह बीमारी वर्तमान भारतीय समाज की जड़ों तक पहुंच चुकी है। मगर अब भी यदि हम निम्नलिखित उपायों को अपनाये तो ‘दहेज : एक सामाजिक समस्या’ से छुटकारा मिल सकता है।

  1. युवक और युवतियाँ दहेज रहित विवाह के लिए संकल्प ले।
  2. अंतरजातीय विवाह को प्रमोट किया जाये।
  3. दहेज लोलुपों का सामाजिक बहिष्कार किया जाये।
  4. सरकार को इस विषय पर ठोस कदम उठाने चाहिए।
  5. सामूहिक विवाह का प्रचलन।
  6. बिना दहेज विवाह करने वालो की पुरष्कृत किया जाये।

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दहेज प्रथा पर निबंध : उपसंहार

दहेज प्रथा का उन्मूलन केवल सरकार के द्वारा नहीं किया जा सकता। इसके लिए देश के प्रेमी, समाज सुधारक और चिंतकों को सामने आना होगा। प्राचीन भारतीय आदर्शो की पुनःप्रतिष्ठा करनी होगी जिसमे नारी को ग्रस्हथी रुपी रथ का एक पहिया समझा जाता था। उसकी छाया में घर-घर स्वर्ग बना हुआ था तथा घर -आंगन फुलहरी सुवासित था और यदि हम ऐसा कर पाये तो वास्तव में नारी की गोद से बड़ा स्वर्ग पृथ्वी पर दूसरा नहीं होगा।

उम्मीद है आप यह सामाजिक कुरीतियों पर लेख ‘दहेज प्रथा पर निबंध हिंदी में‘ सोशल मीडिया पर शेयर अवश्य करेंगे।

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