कंप्यूटर मेमोरी क्या है? कितने प्रकार की होती है ?

कंप्यूटर मेमोरी क्या है:- जिस प्रकार इंसानों में मस्तिष्क होता है चीजों को याद रखने के लिए ठीक उसी प्रकार कंप्यूटर में भी डाटा को याद रखने के लिए मेमोरी होती है जो कि सीपीयू का अभिन्न भाग है |

कंप्यूटर में प्रोग्राम का स्टोरेज करने के लिए मेमोरी की जरूरत होती है | मेमोरी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है रेंडम एक्सेस मेमोरी और रीड ओनली मेमोरी |

रैंडम एक्सेस मेमोरी:- किसी हम अस्थाई मेमोरी भी कह सकते हैं मतलब यह मेमोरी कंप्यूटर के चालू होने से लेकर बंद होने तक के डाटा को ही स्टोर करती है, कंप्यूटर में इनपुट डिवाइस के द्वारा दी गई निर्देश सबसे पहले इसी मेमोरी में स्टोर होते हैं जब तक कि हम उन्हें Save Na kare. यदि अचानक से कंप्यूटर बंद हो जाए या बिजली गुम हो जाए तो रैंडम एक्सेस मेमोरी में स्टोर मेमोरी डिलीट हो जाती है |

इसे कंप्यूटर की Main Or Primary Memory कहां जाता है|  कंप्यूटर पर प्रचलित होने वाले समस्त प्रोग्राम अथवा सबसे पहले इसी मेमोरी में आते हैं|  यह VOLTILE प्रकार की मेमोरी होती है बिजली बंद होते ही सूचना या प्रोग्राम समाप्त हो जाते हैं|

RAM  कंप्यूटर के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण संसाधन (RESOURCE) है| DOS  ऑपरेटिंग सिस्टम केबल 0 से 1MB TAK KI RAM को ही है ADDRESS करने में सक्षम है|  इस 1MB में से पहली 384KB, UPPER MEMORY कहलाती है जोकि सामान्यतः कंप्यूटर सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए आरक्षित रहती है|  1MB में से 384KB के अतिरिक्त बची हुई 640KB उपयोगकर्ताओं के प्रोग्राम हेतु उपलब्ध रहती है|  

यदि पर्सनल कंप्यूटर पर 1MB से अधिक मेमोरी उपलब्ध है  और आप डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोग में ला रहे हैं तब मेमोरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर द्वारा इस  अतिरिक्त मेमोरी का उपयोग किया जा सकता है|  DOS के अतिरिक्त ऑपरेटिंग सिस्टम  जैसे कि विंडोज एवं यूनिक्स इस तरह का बंधन नहीं है आजकल RAM क्षमता अधिक से अधिक 512KB  तक बढ़ाई जा सकती है|

रीड ओनली मेमोरी:- इसे हम कंप्यूटर की स्थाई मेमोरी भी कह सकते हैं जिसमें अनेक प्रकार के डाटा को स्थाई रूप से स्टोर कर सकते हैं, इस प्रकार की मेमोरी को केवल पढ़ा जा सकता है लेकिन इसमें स्टोर डाटा को हम परिवर्तित या नष्ट नहीं कर सकते है|

पर्सनल कंप्यूटर में रीड ओनली मेमोरी (ROM) का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण सूचनाओं और निर्देशों को स्थाई रूप से अपनी मेमोरी में रखने हेतु किया जाता है|  इस मेमोरी में वे महत्वपूर्ण प्रोग्राम संग्रह करके रखे जाते हैं इनका उपयोग कंप्यूटर के परिचालन (Operation) मैं किया जाता है| 

आईबीएम  पर्सनल कंप्यूटर में Read Only memory  में आधारभूत/ आउटपुट प्रणाली (BIOS), BASIC  भाषा का अनुवादक तथा बूटस्ट्रैप लोडर (Boot Strap Loader)  संग्रहित रहता है| बूटस्ट्रैप लोडर का कार्य होता है कि यह कंप्यूटर के चालू (Start)  होते ही डिस्क्राइब को चालू करें तथा फ्लॉपी डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम को कंप्यूटर की रेंडम एक्सेस मेमोरी (RAM)  में ले आए, यह कार्य बूटस्ट्रैप लोडर, आधारभूत इनपुट आउटपुट प्रणाली (BIOS) के साथ मिलकर करता है| 

आरंभिक दौर में उपलब्ध (ROM)  पर सिर्फ एक ही बार कुछ भी निर्देश/ डेटा संग्रह किए जा सकते  थे लेकिन अब ऐसी रोम उपलब्ध है जिन पर पूर्ववर्ती निर्देशों को हटाकर नए निर्देश  संग्रह किए जा सकते हैं| इस प्रकार की ROM को EPROM कहां जाता है|

कंप्यूटर मेमोरी यूनिट क्या है?

जिस प्रकार किलोग्राम, किलो मीटर जैसे मात्रक होते हैं ठीक उसी प्रकार मेमोरी की गणना बाइट्स में करते हैं यहां पर मेमोरी के कुछ विभिन्न यूनिट प्रस्तुत है:

1. Bit: bit यानी Binary Digits. कंप्यूटर डाटा को 0 तथा 1 के मिश्रण से समझता है इसलिए हम इसे bit कहते हैं | तथा Bit कंप्यूटर में डाटा को मापने का सबसे छोटा यूनिट है|
2. Byte (B): यह भी मेमोरी की गणना करने के लिए सूक्ष्म यूनिट है, 1 Byte = 8 Bit
3. किलोबाइट (KB): 1 KB = 1024 बाइट
4. मेगाबाइट (MB): 1 MB = 1024 किलोबाइट
5. गीगाबाइट (GB): 1 GB = 1024 मेगाबाइट
6. टेराबाइट (TB): 1 TB = 1024 गीगाबाइट

कंप्यूटर स्टोरेज डिवाइस क्या है?

हम इन स्टोरेज डिवाइस के द्वारा कंप्यूटर में बहुत सारी डाटा को लंबे समय तक स्टोर कर सकते हैं जैसे वीडियो ऑडियो डॉक्यूमेंट इत्यादि! इसके लिए कंप्यूटर में हार्ड डिक्स, फ्लॉपी डिस्क, San Disk इत्यादि उपलब्ध रहते हैं एवं पेन ड्राइव, सीडी ड्राइव का इस्तेमाल करके सूचना को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में भेजा जा सकता है |

स्टोरेज डिवाइस निम्न प्रकार के होते हैं:

1. मैग्नेटिक डिस्क: यह सिलिका प्लेट से बनी हुई होती है जिसमें दोनों और चुंबकीय पदार्थों का लेप होता है एवं यह प्लेट भी 6 या इससे अधिक है संख्या के 1 पैकेट के रूप में जुड़ी हुई होती हैं जिसे डिस्क पैक कहते हैं| अति तेज गति से डाटा को इनपुट/ आउटपुट करने के माध्यम के रूप में तथा रेंडम एक्सेस मेमोरी के रूप में अतिरिक्त मेमोरी के साधन के रूप में प्रयोग में लाई जाती है| जैसे हार्ड डिस्क,फ्लॉपी डिस्क,जिप ड्राइव इत्यादि!

3.मैग्नेटिक टेप

3.ऑप्टिकल डिस्क: जैसे सीडी ड्राइव, डीवीडी, vcd इत्यादि|

वर्चुअल मेमोरी क्या है?

वर्चुअल मेमोरी के बारे में जानने से पहले हमें रेंडम एक्सेस मेमोरी के बारे में जानकारी हासिल करने होंगे, जैसा कि आप जानते हैं रैम कंप्यूटर की एक अस्थाई मेमोरी होती है जिसमें कंप्यूटर के वह सभी एप्लीकेशन लोड होते हैं जिन्हें हम वर्तमान में कंप्यूटर स्क्रीन पर चला रहे होते हैं लेकिन ऐसी स्थिति बनती हैं जब हमें एक साथ बहुत सारे कंप्यूटर एप्लीकेशन उपयोग करना होता है तभी हमारी कंप्यूटर की RAM यदि कम पड़ जाती है तब हमें कुछ कंप्यूटर एप्लीकेशन को Close करना पड़ता है ताकि हमारा सिस्टम हैंग ना हो सके और उसकी लोडिंग स्पीड धीमी ना हो सके, यदि हम किसी भी कंप्यूटर एप्लीकेशन को बंद किए बगैर एक साथ इस्तेमाल करना चाहते हैं और RAM की कमी हो गई है तब वर्चुअल मेमोरी इस्तेमाल में लाई जाती है |

दरअसल वर्चुअल मेमोरी कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव में से कुछ स्पेस को RAM की तरह इस्तेमाल करती है लेकिन यह Space कंप्यूटर की कुल RAM पर निर्भर करती है यदि आपके कंप्यूटर की RAM 2gb है तो आप 4096 MB ही आपके कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव में से वर्चुअल मेमोरी के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं |

माना कि वर्चुअल मेमोरी रैम की कमी होने के बावजूद एप्लीकेशन कंप्यूटर में लोड करने में मदद करती है लेकिन वही इसका नुकसान भी है क्योंकि यह आपके हार्ड ड्राइव से जुड़ी हुई होती है जिसके कारण कंप्यूटर की परफॉर्मेंस पर भारी असर पड़ता है एवं कंप्यूटर की स्पीड बहुत कम हो जाती है|

जिसके कारण कंप्यूटर क्रैश होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं|

वर्चुअल मेमोरी हार्ड डिस्क का ही हिस्सा होता है यह अधिकांश ऑपरेटिंग सिस्टम का एक सामान्य हिस्सा है क्योंकि यह RAM में नए एप्लीकेशन को लोड करने के लिए मुक्त करता है |

कैसे पता करें कि आप अपने कंप्यूटर में कितनी वर्चुअल मेमोरी इस्तेमाल कर सकते हैं?

माना आपके कंप्यूटर में 4GB रैम है तब आप 4 में 1024 और 2 का गुणा करेंगे तब जो मान आपके सामने आएगा वह आपकी वर्चुअल मेमोरी होगी |

EXAMPLE :- 4*1024= 4069*2= 8192 MB = TOTAL VIRTUAL MEMORY

कैसे आप अपने कंप्यूटर की वर्चुअल मेमोरी बढ़ा सकते हैं?

यदि आपने कंप्यूटर में वर्चुअल मेमोरी बढ़ाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपने कंप्यूटर की कंट्रोल पैनल में जाना होगा जहां से आप वर्चुअल मेमोरी कैलकुलेट कर बढ़ा सकते हैं |

कैश मेमोरी क्या है?

यह Cache Memory इस प्रकार की मेमोरी है जो कंप्यूटर/मोबाइल/ऑपरेटिंग सिस्टम की Speed तेज करने के लिए इस्तेमाल की जाती है एवं यह बार बार इस्तेमाल होने सॉफ्टवेयर के प्रोग्राम निर्देशों को स्टोर करती है यह लगभग RAM की तरह कार्य करती है लेकिन RAM और ROM दोनों से भिन्न है।

दरअसल यह मेमोरी प्रोसेसर में सीधे जुड़ी हुई होती है, Ram की तरह ही कंप्यूटर/मोबाइल बंद होने के बाद Cache Memory भी delete हो जाती है।

कैश मेमोरी दो प्रकार की होती है जो निम्न है-

1. Memory Caching
2. Disk Caching

Bubble Memory क्या है ?

बबल मेमोरी एक ऐसी मेमोरी होती है जिसमें डेटा जब भी स्टोर होता रहता है तब कंप्यूटर ऑफ हो, इस प्रकार की मेमोरी में डाटा को स्टोर करने के लिए कंप्यूटर का ऑन रखना जरूरी नहीं था इसलिए हार्ड डिक्स की जगह बबल मेमोरी का इस्तेमाल करने के लिए अनेक कंपनियों ने इसका निर्माण और प्रचार किया |

परंतु यह मेमोरी लंबे समय तक नहीं चल सकी क्योंकि इसके निर्माण में अधिक खर्च लगता था और इसे कंप्यूटर से बाहर/अंदर लगाया जा सकता था एवं यह अधिक बिजली खपत करती थी, और इसके कारण कंप्यूटर अधिक वजनदार हो जाता था|

बबल मेमोरी में भी बाइनरी सिस्टम होता है इसमें भी बाइनरी कोड 0 और 1 के द्वारा बबल को प्रदर्शित किया जाता है|

1 Bit = 1 Bubble

Flash Memory क्या है ?

फ्लैश मेमोरी एक प्रकार की विशेष मेमोरी है यह चिप आकार की होती है कंप्यूटर के अचानक से बंद हो जाने पर भी इसमें मौजूद डाटा डिलीट नहीं होता है, कंप्यूटर में इसे पीसी कार्ड के रूप में इस्तेमाल करते हैं. वही लैपटॉप में इसे लगाने पर यह हार्ड डिस्क का भी काम करती है।

यह हाथ से कम बिजली में ही कार्य कर सकती है और हार्ड डिस्क के मुकाबले काफी तेज भी है एक फ्लैश मेमोरी भर जाने पर दूसरा कार्ड लगाया भी जा सकता है। डिजिटल कैमरा, एसडी कार्ड के रूप में इस्तेमाल होता है।

कंप्यूटर मेमोरी क्या है? कितने प्रकार की होती है ?

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