भ्रष्टाचार पर निबंध पेश है जिसमे हमने भ्रष्टाचार की समस्या और समाधान, कारण दुष्परिणाम तथा रोकने के उपाय समावेश किया है यहाँ हमने सरल हिंदी भाषा में निबंध लेखन आपके लिए प्रस्तुत किया है क्योंकि लोग गूगल पर खोजते है – भ्रष्टाचार का निबंध, भ्रष्टाचार पर निबंध इन हिंदी, भ्रष्टाचार पर निबंध 200 शब्दों में इत्यादि !

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भ्रष्टाचार पर निबंध की रुपरेखा

  1. प्रस्तावना
  2. भ्रष्टाचार के कारण
  3. भ्रष्टाचार से प्रभावित क्षेत्र
  4. भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम
  5. भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय
  6. निष्कर्ष।

भ्रष्टाचार पर निबंध की प्रस्तावना

भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ व्यवहार या चरित्र से गिरा हुआ होता है। इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति नैतिक रुप से पतिक व्यवहार करता है वह अनैतिक और भ्रष्ट आचरण वाला हुआ करता है। जब कोई व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था में न्याय गिरकर समाज के मान्य नियमों का पालन न करते हुए अपने गलत निर्णय लेता है व्यवहार में गिरा हुआ हो जाता है, तो वह भ्रष्टाचारी होता है।

आचरण की भ्रष्टता, रिश्वत लेकर, कालाबाजारी करके, भाई भतीजावाद फैलाकर जातीय आधार पर उल्लू सीधा करना, किसी वस्तु पर जान बूझकर अधिक लाभ कमाने की दृस्टि से मूल्य वृद्धि कर देना, रुपये-पैसे लेकर कार्य करना, अपने लाभ के लिए दूसरों पहुँचना। ( भ्रष्टाचार पर निबंध )

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भ्रष्टाचार के कारण

  1. किसी क्षेत्र में आभाव के कारण उत्पन्न असंतोष भ्रष्ट और पतित बना देता है।
  2. सम्मान, पद, पैसा न प्राप्त होने पर भ्रष्टाचार पनपने लगता है।
  3. भाई – भतीजावाद, जाति वर्ग एवं संप्रदाय भाषा, लिंग, धर्म के कारण उचित न्याय नहीं हो पाते है और भ्रष्टाचार पनपने लगता है।

भ्रष्टाचार से प्रभावित क्षेत्र

भ्रष्टाचार का क्षेत्र बहुत ही प्रभावित और विस्तृत है। किसी भी क्षेत्र का विधायक या सांसद हो, वह अपने निजी जीवन में किसी भी तरह प्राकतिक एवं अप्राकतिक रुप से भ्रष्ट पाया जाता है, तो यह उसकी महान गलती है। हमारे ऊपर बैठी महान सत्ता के प्रति विश्वाश और श्रद्धा कम या समाप्त हो जाती है। इस भ्रष्टाचार ने सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक और आर्थिक सभी क्षेत्रों में अपना प्रदुषण फैला रखा है।

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भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम

भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम यह हुए है कि ईमानदारी और सत्यता पूर्ण रुप से समाप्त हो चुकी है। बेईमानी और कपट का प्रसार होता जा रहा है। अतः समाज में व्याप्त की जानी चाहिए। भ्रष्टाचार की दशा ऐसी है कि भ्रष्ट व्यक्ति रिश्वत देकर जाता है। उसके जीवन में शिष्ट आचरण की महत्ता बिलकुल भी नहीं है। भ्रष्टाचारी को कठोर दण्ड से ही सुधारा जा सकता है। कितने ही ऊँचे पर पर आसीन भ्रष्ट व्यक्ति को कठोरतम दण्ड मिलना चाहिए न्याय सभी के लिए एकसमान होना चाहिए।

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भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय

भ्रष्टाचार रोकने के लिए कठोर से कठोर दण्डका प्रावधान किया जाना चाहिए। भ्रष्टाचार वर्तमान में बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है। नकली सामान बेचना, मिलती जुलती प्रतियां बेचना, धर्म के नाम पर अधर्म, रिश्वत इत्यादि के लिए कड़े कानून बनने चाहिए एवं इस सिद्धांत का पालन किया जान चाहिए कि न भ्रष्टाचार करेंगे और न करने देंगे !!! ( भ्रष्टाचार पर निबंध )

भ्रष्टाचार पर निबंध उपसंहार

भ्रष्टाचारी लोग समाज और राष्ट्र को बहुत बड़ी हानि पंहुचा रहे है। हमारे राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रीय नैतिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्न लग चुका है। इसे मिटाने की दिशा में राजनैतिक लोगो और समाज के प्रबुद्ध लोगो को आगे आना होगा और खुद को सर्वप्रथम न्यायवादी और शिष्टाचारी सिद्ध करना होगा।

अतः हमें उम्मीद है आपको यह भ्रष्टाचार पर निबंध हिंदी में अच्छा लगा होगा इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करे।