_एक नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस है।_
_स्थापना दिवस पर हम म‍िला रहे हैं एक ऐसे शख्स से जिनका खुद का नाम उस राज्य पर है, ज‍िसमें वह रहते हैं।_
_इस शख्स ने अपने तीन महीने के बेटे का नाम भी प्रदेश की राजधानी के नाम पर रखा है।_

_यह शख्स झाबुआ के शासकीय महाविद्यालय में गेस्ट प्रोफेसर हैं।_
_इनका नाम है मध्यप्रदेश सिंह; जी हां, मध्यप्रदेश सिंह को यह नाम उनके पिता ने सरकारी अफसरों से मिली एक डांट के बाद दिया था।_

_यह साहब अपना नाम मध्यप्रदेश के नाम पर होने से ही संतुष्ट नहीं थे।_
_पहले से ही योजना बना ली थी कि अगर बेटा होगा तो_ _उसका नाम प्रदेश की_ _राजधानी के नाम पर भोपाल सिंह रखेंगे।_
_बीते तीन महीने पहले जब बेटा हुआ तो मध्यप्रदेश सिंह ने उसका नाम रखा ‘भोपाल सिंह’।_

_इस नाम को रखने के पीछे उनका तर्क है कि जब पिता का नाम एक राज्य के नाम पर है तो बेटा उस राज्य की राजधानी होना ही चाहिए।_

_इसलिए मध्यप्रदेश सिंह ने अपने बेटे का नाम भोपाल सिंह रख दिया. इन दोनों नामों से वे बेहद खुश हैं।_

_ऐसा नहीं है कि मध्यप्रदेश सिंह नाम रखने से मध्यप्रदेश सिंह की दिक्कत खत्म हो गई बल्कि उनकी दिक्कतें बढ़ी हैं।_

_अब आलम यह है कि उनको हमेशा अपना पहचान पत्र साथ रखना पड़ता है. कभी ट्रैफिक पुलिस, तो कभी शासकीय अधिकारी यह नाम सुनकर अविश्वास करते है।_

_मगर पहचान पत्र बताने पर सब हैरानी के साथ सामान्य हो जाते हैं।_